Sunday, 10 September 2017

ना जाने दिल क्यों खिंचा जाता है

ना जाने दिल क्यों खिंचा जाता है उसकी तरफ, कया उसने भी मुझे पाने की दुआ माँगी हैं......!!





कुछ रिश्ते.... बुझा...देते...है कुछ...रिश्ते... जला...देते है... हर सूरत...में... राख...होती है...जिंदगी...


समझ आया तमाम सुर्खियाँ ज़माने की कहाँ जाती है। तेरे इन सुर्ख होठों को देखकर बस यहीं रुक जाती हैं।






*हमें अक्सर,महसुस होता है* *कि दुसरों का जीवन,अच्छा है..* *लेकिन* *हम भुल जातें हैं कि,उनके लिए* *हम भी दुसरे ही हैं*





*नाराज़गी भी खूबसूरत रिश्ता है,* *व्यक्ति दिल और दिमाग दोनों में रहता है...





मेरी महबूब उन्हें भी तो मुहब्बत होगी जिनकी सन्नाई ने बख्शी है इसे शक्ल-ए-जमील उन के प्यारों के मक़बीर रहे ....















आज हम दोनो को फुर्सत है चलो इशक करे इशक दोनो की जरूरत है चलो इशक करे


तेरे गुलाबी लाबो से शबनम के दाने चुराऊ जो बात ख़तामें लिखी ना आजा तुझे मैं यू ही आँहे भरते भरते तौबा मैने डरते 







आज फिर शाख से... सुनहरे पतों का जमी पर बरसता देखा फिर तेरी याद के लाये में एक दिन को गुजरता देखा....





हँसी आपकी कोई चुरा ना पाये, आपको कभी कोई रुला ना पाये, खुशियों का दीप ऐसे जले ज़िंदगी में.. कि कोई तूफ़ान भी उसे बुझा ना पाये





अच्छा दोस्त एक फूल की तरह होता हे जिसे हम छोड़ भी नही सकते ओर तोड़ भी नही सकते तोड़ दिया तो मुरझा जाए गा और छोड़ दिया तो कोई और ले जाए गा



नींद आँखों से निकलकर रातभर सोती रही, तेरा चेहरा सामने था गुफ्तगू होती रही...











heelo

heelo
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वो रोए तो बहुत,


वो रोए तो बहुत,

पर मुझसे मुँह मोड कर रोए,

कोई मजबूरी होगी तो दिल तोड कर रोए,

मेरे सामने कर दिए मेरे तस्वीर के टुकड़े,

पता चला मेरे पीछे वो उन्हें जोड कर रोए**




शीशे में डूब कर पीते रहे उस ‘जाम’ को,

कोशिशें तो बहुत की मगर,

भुला न पाए एक ‘नाम’ को**





झूठी ताकत में तू डूबा क्यों #इंसान,

रँग बदलना छोड़ दे तू है दो पल का मेहमान,

ये सोना ये #दौलत कुछ साथ नहीं जायेगा तेरे,

किया कर्म जो तूने बन्दे संग में जायेगा वो तेरे,

हाथ पसार कर माँग लो रब से,

सब कुछ वह तुझको दे देगा,

किया कर्म जो तूने #गन्दा,

फिर ना वह माफी देगा**

तूम छा गये हो कोहरे की तरह,

मेरे चारो तरफ,

न कोई दूसरा दिखता है,

ना देखने की चाहत है**



🌿🌿तुलसी जी की सेवा के लाभ🌿🌿


🌿🌿यद्यपि हम भगवान की शाश्वत पार्षद तुलसी जी का गुणगान पूर्णता कभी नही कर सकते। शास्त्र हमे उनकी आराधना के लाभ के थोड़े से भाग का वर्णन करते है।निचे दिया गया विवरण पद्यपुराण से लिया गया है।

🌿🌿◀तुलसी सभी भक्तिमय क्रियाओं की सार है।

🌿🌿◀तुलसी देवी की पतियाँ फूल मूल छाल शाखाएं तना एवम् छाया सभी आध्यात्मिक है।

🌿🌿◀जो कोई बी भक्ति के साथ तुलसी की लकड़ी का लेप भगवान श्री कृष्ण के अर्चाविग्रह को अर्पित करता है वह सदैव श्री कृष्ण के साथ निवास करता है।

🌿🌿◀ जो कोई भी तुलसी जी के पोधे से मिट्टी लेकर अपने शरीर पर लगाकर भगवान श्रीकृष्ण के विग्रह की आराधना करता है उसे प्रतिदिन 100 दिन आराधना करने का लाभ प्राप्त होता है।

🌿🌿◀ जो कोई भी तुलसी मंजरी भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित करता है उसे सभी प्रकार के फूल अर्पित करने का लाभ प्राप्त होता है।और वह भगवान श्रीकृष्ण के धाम वापिस जाता है।

🌿🌿▶जो कोई भी उस घर या बगीचे के निकट जाता है जहाँ तुलसी जी का पौधा हो वो सभी प्रकार के पापों से तक की ब्राह्मण की हत्या के पापों से भी मुक्त हो जाता है।

🌿🌿◀ जिस घर में बगीचे में शहर में तुलसी जी हो वहाँ भगवन श्रीकृष्ण बहुत प्रसंता के साथ निवास करते है।

🌿🌿◀वह घर जहाँ तुलसी जी है वह घर सब तीर्थो से भी अधिक पवित्र बन जाता है।

🌿🌿◀तुलसी जी की सुगंध लेने से सब शुद्ध हो जाते है।

🌿🌿◀भगवान श्री कृष्ण एवम् सभी देवता उस घर में रहते है जहाँ तुलसी के पोधे की जड़ की मिटटी पायी जाती है।

🌿🌿◀जो भी श्री कृष्ण भगवान की आराधना तुलसी जी की पतियों के साथ करते है उसे सभी यज्ञ दान एवम् तप का लाभ प्राप्त होता है । वास्तव में उसका और कोई बी कर्त्तव्य नही रह जाता और उसने सभी शास्त्रो के मर्म को समज लिया है।

🌿🌿◀ जो अपने मुँह और सिर पे भगवान श्री कृष्ण को अर्पित की गई तुलसी को रखता है वह भगवान श्री कृष्ण के धाम को प्राप्त करता है।

🌿🌿◀कलयुग में जो तुलसी के निकट भगवन श्री कृष्ण के नाम का संकीर्तन करते है वह भगवान के धाम वापिस जाता है।

🌿🌿◀जो भगवान श्रीकृष्ण की आराधना तुलसी जी के साथ करता है वह अपने सभी पुरखो को जनम मृत्यु के चक्र से मुक्ति दिला देता है।

🌿🌿◀जो तुलसी देवी की महिमा का स्मरण एवम् दुसरो को उनका वर्णन बताता है वह पुनः भौतिक जगत में वापिस नही आता**





पता है तुम्हारी और हमारी,
मुस्कान में क्या फ़र्क है ..?
तुम खुश होकर मुस्कुराते हो ,
हम तुम्हें खुश देखकर मुस्कुराते हैं**




एक बार जी भर के देख लो इस चहेरे को,
क्योंकि बार-बार कफ़न उठाया नहीं जाता**
इस दिल मे आ सका न कोई ,
इस दिल को चुरा सका न कोई,
कसूर इसमे किसी का नही आपके तरह,
इस दिल मे जगह बना सका न कोई**
बिकती है न खुशी कही,
न कही गम बिकता है,
लोग गलतफहमी मे है,
कि शायद कही मरहम बिकता है**
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कोई फर्क नहीं होता है ज़हर और प्यार में,
ज़हर पीने के बाद लोग मर जाते हैं;
और प्यार करने के बाद लोग जी नहीं पाते**
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मैंने छोड़ दिया है किस्मत पर यकीन करना
जब लोग बदल सकते हैं तो,
किस्मत क्या चीज़ है**
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सुना है दुआ कबूल होने का,
कोई वक़्त नहीं होता...
दिल जानता है हमने,
तुम्हें किस वक़्त नहीं माँगा**
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इस्लाम का #अर्थ क्या है:~

रामायण में सभी राक्षसों का वध हुआ था लेकिन💥सूर्पनखा का वध नहीं हुआ था
उसकी नाक और कान काट कर छोड़ दिया गया था ।
वह कपडे से अपने चेहरे को छुपा कर रहती थी
रावन के मर जाने के बाद वह अपने पति के साथ शुक्राचार्य के पास गयी और जंगल में उनके आश्रम में रहने लगी ।

राक्षसों का वंश ख़त्म न हो इसलिए, शुक्राचार्य ने #शिवजी की आराधना की ।
शिव जी ने अपना स्वरुप शिवलिंग शुक्राचार्य को दे कर कहा की जिस दिन कोई "वैष्णव" इस पर गंगा जल चढ़ा देगा उस दिन राक्षसों का नाश हो जायेगा ।
उस आत्मलिंग को शुक्राचार्य ने वैष्णव मतलब
हिन्दुओं से दूर रेगिस्तान में स्थापित किया जो आज अरब में "मक्का मदीना" में है ।
सूर्पनखा जो उस समय चेहरा ढक कर रहती थी वो परंपरा को उसके बच्चो ने पूरा निभाया आज भी मुस्लिम औरतें चेहरा ढकी रहती हैं ।

सूर्पनखा के वंसज आज #मुसलमान कहलाते हैं
क्युकी शुक्राचार्य ने इनको जीवन दान दिया इस लिए ये #शुक्रवार को विशेष महत्त्व देते हैं ।
पूरी जानकारी तथ्यों पर आधारित सच है।⛳
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जानिए इस्लाम केसे पैदा हुआ..
👉असल में इस्लाम कोई धर्म नहीं है .एक मजहब है..दिनचर्या है..
👉मजहब का मतलब अपने कबीलों के
गिरोह को बढ़ाना..
👉यह बात सब जानते है कि मोहम्मदी मूलरूप से अरब वासी है ।
👉अरब देशो में सिर्फ रेगिस्तान पाया जाता है.
वहां जंगल नहीं है, पेड़ नहीं है. इसीलिए वहां मरने के बाद जलाने के लिए लकड़ी न होने के कारण ज़मीन में दफ़न कर दिया जाता था.
👉रेगिस्तान में हरीयाली नहीं होती.. एसे में रेगिस्तान में हरा चटक रंग देखकर इंसान चला आता जो की सूचक का काम करता था..
👉अरब देशो में लोग रेगिस्तान में तेज़ धुप में सफ़र करते थे,इसीलिए वहां के लोग सिर को ढकने के लिए टोपी 💂पहनते थे.
जिससे की लोग बीमार न पड़े.
👉अब रेगिस्तान में खेत तो नहीं थे, न फल, तो खाने के लिए वहा अनाज नहीं होता था.
इसीलिए वहा के लोग 🐑🐃🐄🐐🐖जानवरों को काट कर खाते थे. और अपनी भूख मिटाने के लिए इसे #क़ुर्बानी का नाम दिया गया.
👉रेगिस्तान में पानी की बहुत कमी रहती थी,💧 इसीलिए लिंग (मुत्रमार्ग) साफ़ करने में पानी बर्बाद न हो जाये
इसीलिए लोग #खतना
(अगला हिस्सा काट देना ) कराते थे.
👉सब लोग एक ही कबिले के खानाबदोश होते थे इसलिए आपस में भाई बहन ही निकाह कर लेते थे|
👉रेगिस्तान में मिट्टी मिलती नहीं थी मुर्ती बनाने को इसलिए मुर्ती पुजा नहीं करते थे|
खानाबदोश थे ,
👉 एक जगह से दुसरी जगह जाना पड़ता था इसलिए कम बर्तन रखते थे और एक थाली नें पांच लोग खाते थे|
👉दिन भर रेत में चलने से थक जाने पर रात को सुन्दर बीवी चाहिए इसलिए पुरा पैक बुर्का बनाया ताकी वो धुप में काली न हो..
👉कबीले की अधिक से अधिक संख्या बढ़े इसलिए हर एक को चार बीवी रखने की इज़ाजत दि..
🔥अब समझे इस्लाम कोई धर्म नहीं मात्र एक कबीला है..और इसके नियम असल में इनकी दिनचर्या है|
नोट : पोस्ट पढ़के इसके बारे में सोचो.
#इस्लाम_की_सच्चाई
अगर हर हिँदू माँ-बाप अपने बच्चों को बताए कि अजमेर दरगाह वाले ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती ने किस तरह इस्लाम कबूल ना करने पर पृथ्वीराज चौहान की पत्नी संयोगिता को मुस्लिम सैनिकों के बीच बलात्कार करने के लिए निर्वस्त्र करके फेँक दिया था और फिर किस तरह पृथ्वीराज चौहान की वीर पुत्रियों ने आत्मघाती बनकर मोइनुद्दीन चिश्ती को 72 हूरों के पास भेजा थातो शायद ही कोई हिँदू उस मुल्ले की कब्र पर माथा पटकने जाए

"अजमेर के ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती को ९० लाख हिंदुओं को इस्लाम में लाने का गौरव प्राप्त है. मोइनुद्दीन चिश्ती ने ही मोहम्मद गोरी को भारत लूटने के लिए उकसाया और आमंत्रित किया था...
(सन्दर्भ - उर्दू अखबार "पाक एक्सप्रेस, न्यूयार्क १४ मई २०१२).

अधिकांश मुर्दा हिन्दू तो शेयर भी नहीं करेंगे,,
धिक्कार है ऐसे हिन्दुओ पर**
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तुम्हें पता भी नहीं कि तुम्हें क्या मिला है @

तुम्हें पता भी नहीं कि तुम्हें क्या मिला है @
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अपने मन की और देखो ।
मन सदा किसी चमत्कार की मांग कर रहा है
कि जो जीवन तुम्हारे पास है उससे बेहतर हो सके ।
और हर मांग के साथ-साथ एक विषाद है ,
एक शिकायत है ।

जरा अपने चारों और देखो
किसी चमत्कार में तुम जी रहे हो ।
इस जीवन से अधिक बडा़ चमत्कार
और क्या हो सकता है ?

इस छोटे-से ग्रह पर तुम्हारा मनुष्य होना
एक चमत्कार है । यह छोटा-सा ग्रह !
सूर्य इस पृथ्वी से साठ हजार गुना बडा़ है ,
और यह सूर्य ब्रह्माण्ड के अन्य सूर्यों की
तुलना में बहुत छोटा है ।
इस सूर्य से लाखों गुना बडे़ सूर्य हैं और
उनके सौर-मंडल हैं , आकाश गंगाएं हैं ।
लेकिन अब तक भी वैज्ञानिक किसी और
ग्रह का पता नहीं लगा पाए जहां जीवन हो ।

तुम जिस छोटे-से ग्रह पर रह रहे हो ,
वहां जीवन है , ऋतुएं बदलती हैं ,
फूल खिलते हैं , सुगंध है , संगीत है ।
यह पृथ्वी भाग्यशाली है ।

तुम्हें पता भी नहीं कि तुम्हें क्या मिला है ।
यदि इस बात को तुम जान सको तो
अहोभाव के अतिरिक्त तुम्हारे जीवन में
और कुछ नहीं होगा ,
इससे अधिक की मांग तुम न कर पाओगे ।
तुम दूर किसी जीवन-विहीन ग्रह पर
पडे़ हुए पत्थर भी हो सकते थे ,
और उसके बाबत तुम कुछ न कर पाते ।

तुम जीवन से नाचते इस पृथ्वी ग्रह पर
एक नए मनुष्य हो ।
और तुम दुखी हो ?
तुम एक महाअवसर चूक रहे हो ।
इस अवसर का उत्सव मनाओ ,
क्योंकि क्या पता फिर
यह अवसर मिले न मिले ।

अभी यह अवसर है ,
इसे पी लो , इसे जी लो ।
इस चमत्कार को गाओ ,
इस चमत्कार को नाचो ।
इस चमत्कार से बडे़ और बडे़
चमत्कार तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहे हैं ,
लेकिन वे तभी खुलेंगे
जब इस चमत्कार के
उत्सव में तुम
पूरी तरह लीन हो जाओ ।

ओशो

दि डिसिप्लिन आफ ट्रांसेंडेंस

जमाने का रंग फिर उस पर नहीं चढ़ता….
जिस पर कृष्ण प्रेम का रंग चढ़ जाता है
वो सभी को भूल जाता है, जो साँवरे का हो जाता है.
कृष्ण की आँखों में राधा हीं राधा नजर आती है
मानो कृष्ण की आँखें, राधा की थाती है.
अगर तुमने राधा के कृष्ण के प्रति समर्पण को जान लिया
तो तुमने प्यार को सच्चे अर्थों में जान लिया.
राधा-राधा जपने से हो जाएगा तेरा उद्धार
क्योंकि यही वही वो नाम है जिससे कृष्ण को प्यार

Friday, 8 September 2017

हार चुके हैं बदकिस्मती से तो ये बातें फिर से आपको विनर बना देंगी


हार चुके हैं बदकिस्मती से तो ये बातें फिर से आपको विनर बना देंगी





किस्मत का खेल

“किस्मत”... एक ऐसा शब्द है, जिसे कभी-कभी तो लोग बेहद खुशी से पुकारते हैं लेकिन जब वे बेहद परेशान हों तो वे उस इंसान को कोसते हैं जिसने यह शब्द बनाया। लोग कहते हैं कि किस्मत एक राजा को रंक और एक गरीब को भी अमीर बना सकती है। क्या आप भी किस्मत के इस दस्तूर को मानते हैं?



इसे खुद पर हावी ना होने दें

मेरी राय में आजकल हर दूसरा इंसान किस्मत नामक शब्द पर विश्वास करता है। उन्हें लगता है कि उनकी खुशी और दुख, दोनों ही किस्मत के हाथों हैं। इसलिए वे खुद अपने सुख-दुख पर नियंत्रण रखने की कोशिश भी नहीं करते, लेकिन यह तो गलत है ना! आप चाहें तो अपनी किस्मत के सितारों को बदल सकते हैं।




खुशी को जी लें

अगर बदल भी नहीं सकते तो कम से कम जिन खुशियों को महसूस कर सकते हैं उनका तो जी भर के अपने जीवन में स्वागत करें। क्योंकि जब तक हम छोटी-छोटी खुशियों का आनंद नहीं लेंगे, तो ज़ाहिर है कि बड़ी खुशियां भी हमसे मुख मोड़कर जा सकती हैं।



बुरा वक्त अवश्य जाएगा

लेकिन यह बात भी सही है कि जब वक्त ही बुरा चल रहा हो तो हम खुशियों को कैसे महसूस करें? हमारी आंखों के सामने ही जब बहुत बुरा स्थिति खड़ी हो तो ऐसे में हम अपनी ज़िंदगी को अच्छा कैसे मान सकते हैं। लेकिन वक्त हर समय एक जैसा भी तो नहीं रहता, इसलिए वक्त के साथ हमें अपनी सोच भी बदल लेनी चाहिए।



जानें कुछ अनमोल बातें

आज हम आपको एक ऐसी लिस्ट से परिचित कराएंगे जिसमें वह बातें है जो यकीनन आप सभी के जीवन से जुड़ी हैं। कुछ ऐसी बातें जो आपको असल खुशनुमा जीवन का एहसास कराएंगी। जो आपको कहेंगी कि ‘हमें याद करते रहो और मुस्कुराते रहो’। पढ़ें आगे की स्लाइड्स में कुछ ऐसी बातें जिन्हें यदि आप समय-समय पर अपने ज़हन में लाएंगे तो वाकई एक खुशहाल जीवन व्यतीत करेंगे:




आज को भी जी लो

यही तो पल है जो जीवन है... यह बात मैंने कहीं पढ़ी थी, लेकिन तब इसका इतनी गहराई से अर्थ नहीं समझा था, जितना कि आज समझ में आ रहा है। हमारा बीता हुआ कल कैसा था और आने वाला जीवन कैसा होगा, इसके बारे में हम क्यों विचार करें? जबकि हमारे पास हमारा ‘आज’ मौजूद है, यदि बीते कल और आने वाले पल की ही चिंता में लगे रहेंगे तो हम अपना आज कभी भी महसूस नहीं कर पाएंगे।



धीरे-धीरे सब बदलता है

क्योंकि यह आज धीरे-धीरे बीत जाएगा, हमारा बीता हुआ समय बन जाएगा जिसे हमने बिलकुल भी खुशी से अपनाया नहीं था। फिर हम दोबारा से बीते हुए बुरे कल को याद करके दुखी होंगे। इसलिए उस समय की कद्र करें जो हमारे पास है। आप वाकई खुश रहेंगे।



वक्त हमारा जरूर होगा

क्या आपने कभी घड़ी की सुईयों को ध्यान से देखा है? इसमें तीन कांटे होते हैं, एक कांटा सेकेंड्स को दर्शाता है तो अन्य दो कांटे मिनटों तथा घण्टों के बीतने पर बदलते हैं। यदि घड़ी सही काम कर रही है तो सेकेंड्स वाला कांटा कभी नहीं रुकता, लेकिन मिनट वाला और एक घंटे बाद बदलने वाला कांटा भी अपनी समय सीमा के आधार पर बदलता जरूर है। रुकता तो वह भी नहीं!




घड़ी की तरह हैं हमारी ‘लाइफ’

तो इसे देखकर हम क्यों नहीं समझते कि घड़ी के वक्त की तरह हमारा वक्त भी रुका हुआ नहीं है। आज अंधेरा है तो कल उजाला जरूर होगा... और आज यदि दुख है तो एक ना एक दिन खुशी आएगी ही। ऐसे में हम इतने दुखी क्यों हों? बल्कि हमें हिम्मत करके परिस्थितियों से लड़ना चाहिए और अच्छे वक्त का इंतजार करना चाहिए।



हम सुबह एक नया सवेरा है

यह बातें कहने में जरूर अच्छी लगती हैं, कहीं किताबों में पढ़ें तो और भी प्रेरणात्मक लगती हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि हम इन्हें अपनी ज़िंदगी पर अमल नहीं कर सकते। क्योंकि असंभव तो कुछ भी नहीं है... और बुरा वक्त तो मात्र एक परिस्थिति की तरह होता है जो रात के अंधेरे के बाद सूरज उगने के साथ ही रोशनी की तरह नई खुशियों को लेकर आता है।



हमारे हाथ में बंधी नहीं रहतीं यह परिस्थितियां

क्या आप हाथों में हवा को कैद कर सकते हैं? नहीं ना? तो फिर हमेशा की तरह दुख हमारे हाथों को कब तक जकड़ कर रख सकते हैं? यह भी एक ना एक दिन खुद ही हमें रिहा कर देते हैं और खुशियों की ओर ढकेल देते हैं।




यही है आपकी क्षमता

अगला सुझाव हम आपकी क्षमता को दिमाग में रखते हुए बताएंगे... फर्ज़ कीजिए आपको सामने पड़ी अनाज की बोरी उठानी है। यदि आपकी क्षमता साधारण है तो हो सकता है कि आप 20 किलोग्राम की बोरी उठा लें, लेकिन यदि आप शक्तिशाली हैं तो आप 20 किलोग्राम की एक तो क्या, दो बोरियां भी उठा सकते हैं।



क्या आप कर सकते हैं ये?

लेकिन एक साधारण क्षमता वाला इंसान तो एक से अधिक बोरी उठा ही नहीं सकता। बस इसी प्रकार से हमारी ज़िंदगी भी हमें उतना ही दर्द देती है जितना कि हम सहन कर सकें। यदि इससे अधिक मिले तो इंसान टूट जाता है। लेकिन टूटने की बजाय हमें खुद में इतनी क्षमता उत्पन्न कर लेनी चाहिए कि हम परिस्थितियों का सामना कर सकें।



खुद पर गर्व करें

ऐसे में आप खुद पर गर्व भी महसूस करने लगेंगे, क्योंकि अचानक खुद में हिम्मत देखकर आप खुद भी अचंभे में आ जाएंगे। बस यहीं आपको ज़िंदगी की एक और सीख मिल जाएगी। आप समझ जाएंगे कि यही तो आपकी ताकत है, क्योंकि भले ही देखने में हम साधारण हों, लेकिन भगवान ने हमें एक फरिश्ते की तरह पंख लगाकर भेजा है।




अपनी ताकत को पहचानें

बस हमें उन पंखों की ताकत को पहचानने की जरूरत है। इसके लिए सबसे पहले खुद में विश्वास, आत्मविश्वास पैदा करना होगा। क्योंकि यही तो इंसान की सबसे बड़ी ताकत है। याद रखें कि आत्मविश्वास उसी में होता है जिसमें कुछ कर गुजरने की ललक होती है।



ज़िंदगी से हारना नहीं

यदि आप में वह नहीं है, तो माफ कीजिएगा आप कुछ करने से पहले ही ज़िंदगी से हार चुके हैं। लेकिन हमारा सुझाव यही होगा कि हार मानने से पहले बस एक बार अपने विश्वास को जीतने की एक कोशिश तो करें... क्या पता आप सफल ही हो जाएं।



आत्मविश्वास पैदा करें

जहां तक मुझे लगता है एक इंसान का आत्मविश्वास सबसे ज्यादा तब टूटता है जब उसे कोई अपना या फिर गैर ही चोट पहुंचाए। उसकी पहचान का मजाक बनाए और उसे कायर समझने लगे। लेकिन जब ज़िंदगी आपकी है, उससे जुड़े फैसले आपके हैं, दुनिया में नाम भी आपका ही होगा, तो फिर कोई दूसरा आकर आपके आत्मविश्वास को ठेस कैसे पहुंचा सकता है?




किसी की चिंता क्यों करें हम?

और यदि उसने कुछ कह भी दिया तो यह तो हमारी समझ है कि उसे हम किस प्रकार से खुद पर हावी होने दें। इसलिए सबसे पहले तो लोगों की चिंता करना छोड़ दें क्योंकि यदि उनको आपकी चिंता होती तो वे कभी भी आपको चोट ना पहुंचाते। इसलिए अपने दिमाग को चिंताओं से हटाकर अपनी ज़िंदगी को सही बनाने में लगाएं।



प्लानिंग से चलें

आपको परिस्थितियों को सही कैसे बनाना है, कौन सा मार्ग चुनना है और कैसे उस पर अपनी सोच को अमल करना है, आपको यह सब प्लान करने की जरूरत है, ना कि अपनी चिंताओं को लेकर बैठने की। यह बात तो पक्की है कि ज़िंदगी की लड़ाई में हम खुद को अकेला महसूस करते हैं।



अकेले होकर भी खुश रहें

क्योंकि कोई कितना भी अपना हो लेकिन उस दर्द को महसूस नहीं कर सकता जिसका एहसास हमें हो रहा है। इसलिए चाहे अकेले रहकर, लेकिन ज़िंदगी की इस लड़ाई को जरूर लड़ें। और जीतने की ललक खुद में बनाए रखें। वाकई जीत आपकी होगी।




केवल बातें नहीं है ये

यकीनन यह बातें कहना आसान है, कुछ अच्छे शब्दों को जोड़कर बनाया गया यह ब्लॉग जरूर आपको पसंद आएगा। लेकिन मन में एक सोच यह भी आती है कि कहने की बजाय इन बातों को अमल कर सकना बेहद ही मुश्किल है। लेकिन असंभव जैसे शब्द को काटने में जो सुकून मिलता है वह दुनिया की किसी भी अन्य खुशी में नहीं है। और हमें यह करके दिखाना है......

तेरी चाहत अब मेरी आँखों में है

तेरी चाहत अब मेरी आँखों में है  Jaan Dene Ko Pahoche Tha Sab Teri Gali Main  Jab Kutta Picha Pada To Kisi Ne Palat Nahi Dekh...